Wednesday, February 28, 2024

जिंदगी गुजर गई

आज मुलाकात होगी उससे
यही सोचते पुरी जिंदगी गुजर गई
मर हम गए
साथ उसकी यादे भी मर गई....

याद तो हर रोज आती थी ओ
उसकी याद मे राते भी गुजर गई
सपनो को भी नहीं छोडा उसने
उसकी याद मे पुरी जिंदगी गुजर गई

पागल थे हम उसकी एक हसी पर
उसके साथ ओ हमारी मुस्कुराहट ले गई
क्या कुसुर था मेरा
ओ हमारी जान भी ले गई....


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खिडकी

खिडकीच उघडून झालं वाऱ्याशी झगडून झालं हातात चहाचा कप घेऊन जरा स्वतःशी बोलून झालं . . . . . नेहमी आठवणीत राहशील तू . . . . . खिडकी