Sunday, November 13, 2022

निरागस प्रतिबिंब

मंद कोवळ हे मन तुझं
तुझं हे निरागस प्रतिबिंब
चंद्र चांदण्यांची रात जणू
चौफेर दरवळणारा सुगंध

सुंदर अलवार साजनी तू
मंद वाऱ्याची तू मोहर
निरागस गोंडस हास्य तुझं
डोळे तर सप्तरंगी कहर


No comments:

Post a Comment

परिस्थिती

चल रही है परिस्थिती आपके विरुद्ध तो चलने दो  बह रहा है पानी तो बेशक उसे बहने दो  आएगा समय तेरा भी ढल रहा है दीन तो ढलने दो... हर रात के बाद ...