तुझं हे निरागस प्रतिबिंब
चंद्र चांदण्यांची रात जणू
चौफेर दरवळणारा सुगंध
सुंदर अलवार साजनी तू
मंद वाऱ्याची तू मोहर
निरागस गोंडस हास्य तुझं
डोळे तर सप्तरंगी कहर
चल रही है परिस्थिती आपके विरुद्ध तो चलने दो बह रहा है पानी तो बेशक उसे बहने दो आएगा समय तेरा भी ढल रहा है दीन तो ढलने दो... हर रात के बाद ...
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