करते भिरभिर
चालते स्वैर
बेधुंद मन
सुसाट ते सुटते
पक्षी बनते
आवर घाल
बेफिकर मनाला
सावर त्याला
बेधुंद मन
बिफिकर ते उडे
सगळीकडे
✍🏻✍🏻
चल रही है परिस्थिती आपके विरुद्ध तो चलने दो बह रहा है पानी तो बेशक उसे बहने दो आएगा समय तेरा भी ढल रहा है दीन तो ढलने दो... हर रात के बाद ...
No comments:
Post a Comment