Monday, January 17, 2022

प्रशंसापत्र


शब्दमंच आयोजित साप्ताहिक उपक्रम - 2

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परिस्थिती

चल रही है परिस्थिती आपके विरुद्ध तो चलने दो  बह रहा है पानी तो बेशक उसे बहने दो  आएगा समय तेरा भी ढल रहा है दीन तो ढलने दो... हर रात के बाद ...