Sunday, January 30, 2022

प्रशंसापत्र


शब्दमंच आयोजित उपक्रम - 4
Thank you शब्दमंच टिम🙏🙏🥰

प्रशंसापत्र - 3



प्रशंसापत्र आयोजित उपक्रम - 3
शब्दमैफिल स्पर्धा....

Friday, January 28, 2022

लोग बदल जाते है





ये तो पता था की मौसम बदल जाते हैं
ये भी पता था की वक्त भी बदल जाते हैं
लेकीन ये दोनो ने ही समझाया की 
यार वक्त और मौसम दोनों बदल जाने पर 
लोग भी बदल जाते हैं....

स्वप्नमयी....✍🏻✍🏻✍🏻

छोड जाते हैं लोग



वक्त के साथ साथ जैसे लोग बदलते चले जाते हैं....
तब समझमे आता है की लोग बदलते बदलते हमें भी छोडते चले जाते हैं....


स्वप्नमयी....✍🏻✍🏻✍🏻


इन्सानियत को मार दिया



वक्त के साथ साथ खुद को भी बदल दिया तुने....
चंद पैसो के लिये अपने भाई को ही छोड दिया तुने....
माना की इस दुनिया मे पैसो से ही काम चालता है  
लेकीन...........
उसके साथ इन्सानियत को ही मार दिया तुने......


स्वप्नमयी....✍🏻✍🏻✍🏻

Thursday, January 27, 2022

you....

काहीवेळा शांतता ही 
काही बोलू इच्छिते
फक्त ते ऐकण्यासाठी 
स्वतःच्या मनालशी 
तितकंच शांत ठेवावं लागते.....

you....

Tuesday, January 25, 2022

शायरी खूशी




शब्दमंच आयोजित उपक्रम - 4
दिनांक -25/1/2022
विषय - खूशी ( शायरी )
स्पर्धेसाठी

आज का दीन बुरा गया तो क्या हुआ
कल का दीन अच्छा आएगा....
जिंदगी खुशी से जी लो यारो
वक्त ही तो हैं.... 
एक दीन बदल ही जाएगा.....

स्वप्नमयी.....✍🏻✍🏻

खिडकी

खिडकीच उघडून झालं वाऱ्याशी झगडून झालं हातात चहाचा कप घेऊन जरा स्वतःशी बोलून झालं . . . . . नेहमी आठवणीत राहशील तू . . . . . खिडकी