मज व्याकूळ करी
ये लवकरी...
बंध प्रेमाचे
जुडूनी आले रंग
सहवासाचे.....
कायम हवा
सहवास तुझा तो
हर्ष नवा तो....
चल रही है परिस्थिती आपके विरुद्ध तो चलने दो बह रहा है पानी तो बेशक उसे बहने दो आएगा समय तेरा भी ढल रहा है दीन तो ढलने दो... हर रात के बाद ...
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